हवा ,पानी के साथ चक्रवाती तूफान 'रेमल' का हड़कम्पः
हवा ,पानी के साथ चक्रवाती तूफान 'रेमल' से मचा हड़कम्पः चक्रवाती तूफान ने मचाया हड़कम्प भारी हवा और बारिश के साथ 'रेमल' तूफान ने 26 मई को रात में लगभग 8.30 बजे 'पंश्चिम बंगाल 'के 'कैनिंग' में लगभग 135 किलोमीटर प्रति घंटा की SPEED से लैंडफॉल हुआ | तूफान आने के लगभग 4 घंटे तक भारी हवा के साथ बारिश भी हुई |
'रेलम' तूफान पंश्चिम बंगाल की ओर लगभग 13 किमी प्रति घंटा की SPEED से आगे बढ़ रहा है | 'रेलम तूफान' का प्रभाव कई राज्यों में दिखने की संम्भावना है जैसे कि त्रिपुरा,असम,मेघालय,सिक्किम में इस तूफान का काफी असर देखने को मिल सकता है|
इस तूफान की वजह से कई राज्यों हवा के साथ बारिश होने की पूर्ण संभावना है
मौसम विभाग के अनुसार ओडिशा, झारखण्ड और बिहार में बारिश होने के असार बने हुए है|
भारतीय केन्द्र सरकार की ओर से पंश्चिम बंगाल के तटीय इलाको पर NDRF की 12 टीमों को तैनात कर दिया गया था |
और इसके अलावा सरकार की तरफ से जहाजों और विमानों में सेना,नौसेना और क़ॉस्ट गार्ड भी इमरजेंसी के लिए भेज दिये थें |
भारत सरकार ने सुरक्षा की द्रष्टि से बंगाल के तटीय इलाको से लगभग 1.10 लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था|
इस तूफान का नाम ' अरबी भाषा' के शब्द पर रखा गया है - अरबी शब्द ' रेमल' जिसका अर्थ होता है ' रेत '|
ओमान ने इस तूफान का नाम 'रेमल' दिया |
आपदाओं के नाम सरल शब्दों में इसलिए रखे जाते है ताकि सभी लोग आसानी से याद कर सके - रेमल
आप सभी के मन में सवाल जरूर आ रहा होगा कि तूफान आते तो इन तूफानों का नामकरण कौन करता है---
दरअसल आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इनकी एक समिति होती है जिसमें कई देश शामिल रहते है तो इसी प्रकार से WORLD मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) एक समिति है जिसमें UN की इस संस्था में 186 देश सदस्य है |
भारत सरकार का कहना है कि WMO ने 1972 में पैनल ऑन ट्रॉपिकल साइक्लोन्स की स्थापना की थी| 'ओमान' ने साल 2000 में अपनी राजधानी 'मस्कट' में जब PTC की 27वीं बैठक हुई , तो सभी देशों ने बंगाल की खाड़ी के नाम और अरब महासागर में उठने वाले सभी तूफानों के रखने का फैसला लिया था|
इसके बाद से समुद्र में उठने वाले सभी प्रकार के तूफानों नाम रखने का सिलसिला चालू हुआ |
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